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क्या मस्त हिंदी सायरी

धोखा, वफ़ा, फरेब ज़माने में रह गए..
हम दोस्ती का फ़र्ज़ निभाने में रह गए..
जो साथ चले थे वो आगे निकल गए..
हम रास्ते का पत्थर हटाने में रह गए....
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हर एक नदिया के होंठों पे समंदर का तराना है,
यहाँ फरहाद के आगे सदा कोई बहाना है
वही बातें पुरानी थी, वही किस्सा पुराना है,
तुम्हारे और मेरे बीच में फिर से ज़माना है 
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जिसकी धुन पर दुनिया नाचे, दिल एक ऐसा इकतारा है,
जो हमको भी प्यारा है और, जो तुमको भी प्यारा है.
झूम रही है सारी दुनिया, जबकि हमारे गीतों पर,
तब कहती हो प्यार हुआ है, क्या अहसान तुम्हारा है.
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जो धरती से अम्बर जोड़े , उसका नाम मोहब्बत है ,
जो शीशे से पत्थर तोड़े , उसका नाम मोहब्बत है ,
कतरा कतरा सागर तक तो ,जाती है हर उमर मगर ,
बहता दरिया वापस मोड़े , उसका नाम मोहब्बत है .
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पनाहों में जो आया हो, तो उस पर वार क्या करना ?
जो दिल हारा हुआ हो, उस पे फिर अधिकार क्या करना ?
मुहब्बत का मज़ा तो डूबने की कशमकश में हैं,
जो हो मालूम गहराई, तो दरिया पार क्या करना ?
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बस्ती बस्ती घोर उदासी पर्वत पर्वत खालीपन,
मन हीरा बेमोल बिक गया घिस घिस रीता तनचंदन,
इस धरती से उस अम्बर तक दो ही चीज़ गज़ब की है,
एक तो तेरा भोलापन है एक मेरा दीवानापन.
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तुम्हारे पास हूँ लेकिन जो दूरी है समझता हूँ,
तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है समझता हूँ,
तुम्हे मै भूल जाऊँगा ये मुमकिन है नही लेकिन,
तुम्ही को भूलना सबसे ज़रूरी है समझता हूँ
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हम फकीरों से जो चाहे दुआ ले जाए,
फिर खुदा जाने किधर हमको हवा ले जाए,
हम सरे राह लिए बैठे हैं चिंगारी,
जो भी चाहे चिरागों को जला ले जाए,
हम तो कुछ देने के काबिल ही कहां हैं लेकिन,
हां, कोई चाहे तो जीने की अदा ले जाए।
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न जाने क्यों हमें आँसू बहाना नहीं आता!
न जाने क्यों हाल-ऐ-दिल बताना नहीं आता!
क्यों सब दोस्त बिछड़ गए हमसे!
शायद हमें ही साथ निभाना नहीं आता!
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कुछ तो जीते है जन्नत की तमन्ना लेकर
कुछ तमन्नाएं जीना सिखा देती है. हम
किस तमन्ना के सहारे जिए
ये ज़िन्दगी रोज़ एक तमन्ना बढा देती है.
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तेरी तम्मना में इस कदर खोये थे
ना जगे थे हम ना हम सोये थे.
पुंछ लेना खुदा से अगर यकीन ना हो
तेरी आरजू मैं हम हर शाम रोये थे
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अजनबी बनके कोई आया था,
ऐसा लगा जैसे वो मेरा साया था,
लोग कहते थे रौशनी है मेरे घर में
उसने तों दील में दिया जलाया था
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कसूर ना उनका है ना हमारा
हम दोनों ही रिश्तों की रश्में निभाते रहे
वो दोस्ती का एहसास जताते रहे
हम मोहब्बत को दिल में छुपाते रहे!

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आपने अपनी आँखों में नूर छुपा रखा है
होश वालो को दीवाना बना रखा है
नाज़ कैसे न करू आपकी दोस्ती पर
मुज जैसे नाचीज को खास बना रखा है.
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फूल सुख जाते है एक वक्त के बाद
लोग बदल जाते है एक वक़्त के बाद
अपनी दोस्ती भी टूटेगी एक वक़्त के बाद
लेकिन वोह वक़्त आयेगा मेरी मौत के बाद...
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हम दोस्ती में हद ए गुज़र जायेंगे
यह जिंदगी आपके नाम कर जायेंगे
आप रोया करेंगे हमे याद करके
आपके दामन में इतना प्यार छोड़ जायेंगे
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माँ के प्यार का एहसास तो है
पर माँ को माँ कहने का वक़्त नहीं
सारे रिश्तों क हम मार चुके
अब उन्हें दफ़नाने का भी वक़्त नहीं...
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सारे नाम मोबाइल में हैं
पर दोस्ती के लिए वक़्त नहीं,
गैरों की क्या बात करें
जब अपनों के लिए ही वक़्त नही
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ज़ख्म देने का अंदाज़ कुछ ऐसा है
ज़ख्म देकर पूछते है अब हाल कैसा है,
ज़हर देकर कहते है पीना ही होगा ,
जब पी गए ज़हर तो कहते है अब जीना ही होगा.."
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कोई अच्छा लगे तो उसे प्यार मत करना
उसके लिए नींदें बेकार मत करना
दो दिन तो आयेंगे खुशी से मिलने
तीसरे दिन कहेंगे मेरा इंतज़ार मत करना
  

1 comments:

Butterfly said...

Very Nice
It's Good

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Hi, My name is anup, from delhi, india. have completed my MBA & doing job as an online marketing executive. I really love to write sayings, enjoying with friends and playing cricket whenever I get free.
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