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क्यों करे प्यार जब चोट खाना ही है


क्यों लिखे अपना नाम किसी के दिल पे जब उसे मिट जाना ही है,
क्यों दे किसी को खुशियां जब उसे रुलाना ही है.

क्यों करे वादें जब तोड़ जाना ही है,
क्यों करे प्यार जब चोट खाना ही है..........

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